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Inspirational Sms

Displaying 57-64 of 673 results.
Nov
26
2015

Inspirational Sms


The secret of health for both mind and body is not to mourn for the past, not to worry about the future but to live in the present moment wisely and earnestly!

Submitted By : aayush
Place : New Delhi
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Nov
26
2015

Inspirational Sms


To worry is the worst way predicting what will happen next. It achieves nothing while consuming a lot of your time and energy Let things unravel and trust in your ability to overcome whatever comes your way.

Submitted By : aayush
Place : New Delhi
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Rating :   21 Votes


Nov
26
2015

Inspirational Sms


जब टूटने लगे हौंसले तो बस यही याद रखना,
बिना मेहनत के कोई तख्तो-ताज हासिल नहीं होते,
ढूंढ लेना अंधेरों में मंज़िल अपनी,
क्योंकि जुगनू कभी रौशनी के मोहताज़ नहीं होते.


Submitted By : aayush
Place : New Delhi
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Nov
26
2015

Inspirational Sms


"दरिया" बन कर किसी को डुबाना बहुत आसान है.




मगर "जरिया" बनकर किसी को बचायें तो कोई बात बनें।

Submitted By : aayush
Place : New Delhi
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Oct
18
2015
Start by doing whats necessary then do whats


Start by doing what's necessary , then do what's possible and suddenly you are doing the impossible..

Submitted By : Sanket
Place : surat
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Oct
6
2015
Perfection is not achieved completely by Anyone


Perfection is not achieved completely by Anyone in the World. But if you keep chasing PERFECTION, Somewhere on the way, you may catch EXCELLENCE......Good morning

Submitted By : Sanket
Place : surat
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Oct
2
2015
The strongest people arent always the people who


The strongest people aren't always the people who win, but the people who don't give up when they lose.

Submitted By : Sanket
Place : surat
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Sep
26
2015

12-13 -


एक 12-13 साल के लड़के को बहुत क्रोध आता था। - उसके पिता ने उसे ढेर सारी कीलें दीं और कहा कि जब भी उसे क्रोध आए
वो घर के सामने लगे पेड़ में वह कीलें ठोंक दे। पहले दिन लड़के ने पेड़ में
30 कीलें ठोंकी। अगले कुछ हफ्तों में उसे अपने क्रोध पर धीरे-धीरे नियंत्रण
करना आ गया। अब वह पेड़ में प्रतिदिन इक्का-दुक्का कीलें ही ठोंकता था।
उसे यह समझ में आ गया था कि पेड़ में कीलें ठोंकने के बजाय क्रोध पर
नियंत्रण करना आसान था। एक दिन ऐसा भी आया जब उसने पेड़ में एक
भी कील नहीं ठोंकी। जब उसने अपने पिता को यह बताया तो पिता ने उससे
कहा कि वह सारी कीलों को पेड़ से निकाल दे। लड़के ने बड़ी मेहनत करके
जैसे-तैसे पेड़ से सारी कीलें खींचकर निकाल दीं। जब उसने अपने पिता को काम
पूरा हो जाने के बारे में बताया तो पिता बेटे का हाथ थामकर उसे पेड़ के पास
लेकर गया। पिता ने पेड़ को देखते हुए बेटे से कहा – “तुमने बहुत अच्छा काम
किया, मेरे बेटे, लेकिन पेड़ के तने पर बने सैकडों कीलों के इन निशानों को देखो।
अब यह पेड़ इतना खूबसूरत नहीं रहा। हर बार जब तुम क्रोध किया करते थे तब
इसी तरह के निशान दूसरों के मन पर बन जाते थे। अगर तुम किसी के पेट में
छुरा घोंपकर बाद में हजारों बार माफी मांग भी लो तब भी घाव का निशान वहां
हमेशा बना रहेगा। अपने मन-वचन-कर्म से कभी भी ऐसा कृत्य न करो
जिसके लिए तुम्हें सदैव पछताना पड़े…!!

जीवन क्या है



Submitted By : Pratik
Place : Surat
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